About Directors
SANJAY JEEWANE
Founder of Bodhisattva Foundation
SHORT INTRO ABOUT OUR DIRECTOR
नाम : संजय शांताबाई आनंदराव जीवने
उम्र : 6० वर्ष (जन्म तिथी – ०६.०७.१९६२)
पत्ता : ‘सांची’, १४, रमानगर, रेणुका विहार कॉलनी के पिछे, रामेश्वरी रिंगरोड
पोस्ट – भगवान नगर, नागपुर – ४४००२७ – मोबाईल नंबर – ९८८११७५८४२
संस्थापक – भारतीय दलित रंगभूमि, नागपुर, (१९९०)
संस्थापक – अंकूर मानव समाज उत्थान केंद्र, नागपुर (१९९२)
संस्थापक – बुद्धिस्ट आर्ट अकादमी, नागपुर, (१९९५)
संस्थापक – अश्वघोष फिल्म अँड टेलिव्हिजन इन्स्टिट्यूट (२००६)
संस्थापक – सेल्युलाईड फिल्मस्, बा फिल्मस् (२००९)
पुरस्कारों से सम्मानित
- २००१ चौकट द्वारा विदर्भ भूषण पुरस्कार’ से सम्मानित
- २००४ अखिल भारतीय मराठी नाट्य परिषद द्वारा ‘श्रेष्ठ रंगकर्मी सम्मान से पुरस्कृत
- २००६ जीवक साहित्य पुरस्कार प्राप्त
- अखिल भारतीय मराठी नाट्य परिषद, नागपुर शाखा की ओर से राम गणेश गडकरी स्मृति दिवस पर सर्वोत्कृष्ट निर्देशन पुरस्कार २००६ से सम्मानित
- महाराष्ट्र शासन के राज्य नाट्य स्पर्धा में लेखन, निर्देशन एवं अभिनय के लिए पांच बार रौप्य पदकों से सम्मानित (पैदागीर निर्देशन (१९९१), (नक्सलाइट निर्देशन एवं अभिनय १९९९), (पाटा-वरवंटा निर्देशन २००२)
- विख्यात फिल्म निर्देशिका चित्रा पालेकरजी की फिल्म ‘मातीमाय’ में भूमिका
- ‘क्राय’ के लिए बनी फिल्म ‘चल रुनझुन सपने देखें’ के इन्चार्ज एवं भूमिका.
- विविध नाट्य स्पर्धााओं का परीक्षण किया.
- नागपुर दूरदर्शन केंद्र एवं आकाशवाणी नागपुर व मुंबई में साक्षात्कार.
- कवी एवं गीतकार – न्यूज पेपर एवं मासिकों में कविता प्रकाशित. कवि संमेलनों का प्रभावी संचालन
- भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के गीत एवं नाट्य विभाग के पंजीकृत दल के रूप में सात वर्ष कार्य
- फ्रान्स के प्रो. जॉर्ज नेगी ने उनके दलित थिएटर इस शोध निबंध में संजय जीवने के ‘दलित सॉलिडॅरिटी’ इस नाट्य पर शोध किया.
- नागपुर दूरदर्शन केंद्रद्वारा निर्मित याकूब सईद निर्देशित ‘सखारामचे स्वप्न’ इस मराठी मालिका में अभिनय
- १ व २ जुलै २००८ – भारतेंदू नाट्य अकादमी, संस्कृती विभाग, लखनौ, उत्तर प्रदेश शासन – ऑडीशन तथा साक्षात्कार समिति के सम्मानित सदस्य मनोनित.
- २२ फरवरी २०११ – ‘गोव्यातील रंगभूमीची वाटचाल’ इस विषय पर परिचर्चा में सहभाग (आयोजक – महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा)
- २१-२३ अप्रैल २०११ भारत सरकार के साहित्य अकादमी, नई दिल्ली में आयोजित भारतीय दलित साहित्य संगोष्टी में ‘समकालीन दलित रंगभूमी एवं लोककला’ इस विषयपर शोध निबंध प्रस्तुत
- भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला (भारत सरकार) ‘दलित साहित्य की अवधारणा में रंगमंच’ इस विषय के अंतर्गत राष्ट्रीय संगोष्टी में ‘दलित नाट्य एवं दलित रंगमंच’ इस विषयपर शोध निबंध प्रस्तुती.
- नवंबर २००६ सेंट्रल जेल नागपुर के उम्र कैद भुगत रहे २३ बंदीयों को लेकर महाराष्ट्र शासन द्वारा आयोजित राज्य नाट्य महोत्सव में ‘पाटा-वरवंटा’ नाटक का मंचन किया. जिसने इतिहास रचा और महाराष्ट्र शासन द्वारा प्रथम सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार से गौरवान्वित किया गया…
- नवंबर २०१० – येरवडा जेल, पुना (ओपन जेल) के उम्र कैद भुगत रहे २० बंदीयों को लेकर महाराष्ट्र शासन द्वारा आयोजित राज्य नाट्य महोत्सव में ‘संघर्ष’ नाट्य का मंचन
- २०११ – पारधीयों पर हुये अत्याचारों पर आधारित ‘पारधी माफिया, गुनहगार की आदमी ?” इस डाक्यूमेंट्री फिल्म का निर्देशन वा फिल्मस् प्रस्तुती
- २००६ ‘झेन बुद्धिझम’ पर डाक्यूमेंट्री फिल्म का लेखन. एनलाईटन फिल्मस् प्रस्तुती.
- २००९- ‘एक छोटीसी गुडीया की लंबी कहानी’, सीडी का निर्माण.
- गडचिरोली के कुरखेडा एवं आष्टी में आदिवासियों के लिए नाट्य प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन.
- ऑल इंडिया रेडियो पर (नागपुर केंद्र) अनेक नभोनाट्यों (ड्रामा) की प्रस्तुती
- १० ऑक्टो. २०१२ – मुंबई के षण्मुखानं सभागार में ‘रापी’ (महाराष्ट्र के चर्मकारों की दशा पर आधारित) दो अंको नाटक प्रस्तुत हो रहा है.
- सफल आयोजन
- १९८४ में उमरेड से सडेश्वर बैलबंडी सांस्कृतिक जन्ना का आयोजन
- १९८६ वैदर्भीय नुक्कड नाटय जत्रा का आयोजन
- १९९० संस्कार शिविरों का आयोजन
- १९९१ ‘बुद्ध अंड हिज धम्मा’ पर स्पर्धा का आयोजन
- १९९३ – पहला फुले-आम्बेडकर बाल संस्कार मेळावा का भव्य आयोजन
- १९९७ – बौद्ध सांस्कृतिक परिषद का आयोजन (तीन दिवसीय)
- २००४ – बौद्ध महिला संमेलन का आयोजन
- अनेक सामाजिक सांस्कृतिक आंदोलनों में सक्रीय सहभाग
- अनेक साहित्य संमेलन एवं नाट्य संमेलनों में नाट
- प्रस्तुती एवं आलेख वाचन-
- ‘लोकशिल्प’ साप्ताहिक का दो वर्ष संपादन
- अनेक वर्तमानपत्र एवं मासिकों में लेख प्रकाशित
- अंधश्रद्धा निर्मूलन के लिए जनजागरण
- लिखित, निर्देशित एवं अभिनित नुक्कड नाटक
मंत्र्याचा बंगला, आंदोलन, गर्जना, घोषणा, ठिय्या, बीडी कामगार, खदान, दलित सॉलिडॅरिटी, सूर्योदय, भूकंप, एक खुशखबर! भारत भोगवादी हो गया है. रिपब्लिकन जायनस की अमर कहानी, संविधान, तिमीरभेद, जिंदाबाद, कश्मीर की कली, भारत-पाकिस्तान और कश्मीर, ढोंगीक्रांती, आरक्षण, ठाकराम सुकडीचा तमाशा, संघर्ष, टेररिस्ट, धम्मक्रांती, टेरर, मी संपूर्ण भारत बौद्धमय करीन. रिपब्लिकन जनहो, युद्धखोर, खैरलांजी, दिशा, नैले पे दैल्या, मंडल आयोग, समता, १५ ऑगस्टवाल्या स्वातंत्र्या, संविधान, दलित डॉट कॉम, आरक्षण २०११ आरक्षण २०१२, दोघी. आदि…..
लिखित एवं निर्देशित एकांकिका
आशा, समर, डायन, आंडेल, प्रतिक्रांती, जयस्तंभ, काडीमोड, मुसळधार अंधार, धुमाकूळ, अमन के चेहरे, आम्ही, मुक्ताई, चंदर पोचीराम कांबळे, आई, बळीराजा, बटोल्ट ब्रेख्त, प्रतिबंध, संथाल, मदर अर्थ, सावित्रीची लेक, चौथा स्तंभ, किन्नर कोण?, आस, घेटोज आदि…..
स्टेज प्ले (दोन अंकी ड्रामा) का लेखन एवं निर्देशन
पैदागीर, युगांत, सिद्धार्थ गौतम, रेडक्रॉस, टोळी, टोली, सिंहनाद, नक्सलाईट, छुपा अजेंडा, कांतीज्योती, उलगुलान ब्लॅक टायगर, खैरलांजी, पटाचारा संघर्ष, टेररिस्ट, पाटा-वरवंटा, रापी आदि
महाराष्ट्र शासन द्वारा पुरस्कृत एवं चर्चित बालनाट्यों का लेखन, निर्देशन
जयस्तंभ, ये बुद्ध की धरती, भारत माझा देश आहे. चिल्ड्रन ऑन स्ट्रिट, खेळ, भट्टी, बाल रमाई, बाल भीवा, बाल सावित्री, बाल भगत, गटणंग, फाळणी १९४७, आदि..
एकल प्रयोग (एक पात्री प्रयोग)
भूक, १५ अगस्त, मे अभी जिंदा हूं, टेररिस्ट, फुलन, मजूर, मी रमाबाई आंबेडकर बोलतेय, मी डॉ. आंबेडकर बोलतोय, मी जोतीराव फुले बोलतोय, क्रांतीमाता, खैरलांजीचं भूत भोतमांगे, कबीर, घोटाला आदि…..
तीन महानाट्यों की प्रस्तुती
‘धम्मपथ’ – लेखन, निर्देशन
‘युगयात्रा’ – लेखक म.भी. चिटणीस, निर्देशन संजय जीवने
‘सम्राट अशोक’ – लेखन, निर्देशन
आगामी महानाट्य कृती
‘भारत सिंधू से हिंदू तक’ – लेखक संजय जीवने
‘दो छत्रपति ‘– शाहू, शिवाजी’ लेखक – संजय जीवने.
प्रकाशित नाट्यकृति
नक्सलाईट, पटाचारा, मी संपूर्ण भारत बौद्धमय करोन, आरक्षण (नुक्कड नाटक) आदि…
विशेष उल्लेखनीय कार्य
रास्ते पर भटकने वाले छोटे छोटे बच्चों से लेकर, घरेलू काम करनेवाली महिलाए, गंगा-जमुना में देह का व्यापार करने वाली लडकीयां, खदान कामगार, गुनहगारों की बस्ती समझी जाने वाली टोली में रहने वाले मांगगारोडी, ठिय्या कामगार, जेल में उम्रकैद की सजा भुगतने वाले बंदी, बीडी कामगारों के बच्चे, गडचिरोली की आदिवासी महिलायें, पारधी समाज के बच्चे इन्हें अभिनय सिखाकर रंगमंच पर लाया, सांस्कृतिक क्रांति के लिए उन्हें अग्रेसर कर उनमें मन:परिवर्तन की ज्योत जलाई. इसकी गति बहुत धिमी है अपितु वह प्रभावशाली है. इन्सान को पूर्णत्व प्राप्त करने की सांस्कृतिक जंग वे लड़ रहे है. रंगभूमि उनके लिए आम अवाम की युद्धभूमि है.
AMAR BOUDH
President of Bodhisattva
Mrs. PUSHPA BOUDH
Elder Advisor of Bodhisattva Foundation
ABOUT ME
Working since 1990 as a social reformer worked in different areas of Madhya Pradesh district. Worked door to door in remote places of Madhya Pradesh in villages spreading dhamma in people.
ORGANIZATION
Rashtriya Parivarik Dhamma Sangoshti Boudh Mahila Maitri Sangh, Nagpur.
Going to every corner of India, I do the work of propagating Buddha Dhamma. Till now I have conveyed my message to lakhs of people through Parivar Dhamma seminar, guiding people on Buddhism’s rites, conduct, marriage method etc.
EDUCATION
Bachelor of Arts Diploma in Makeup & Arts
WORK EXPERIENCE
- Running mahila maitry
- sangha nagpur Boudhh sankhar karta
- So many budhhist marriages, Birth ceremony, Baby shower, Naam karan sankhar , Death ceremony Done by her
- She is contributing to the society from last 35 years
- She is Buddhist writer & Director for budhhist plays
- Dhamma Councilor she is resolved so many families problems by dhamma council
- She is working on child dhamma education
- She makes 200+ budhhist sankhar karta women
- 150+ national & international awards for social & dhamma work